आज राम बनना कठिन और रावण बनना आसान है…..sir. sheetal tiwar-=report

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झांसी। सीपरी बाजार के अब्दुल कलाम पार्क में चल रही श्री रामकथा में चतुर्थ दिवस का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि आज राम बनना कठिन और रावण बनना आसान है।एक तरफ हम राम राज्य की कल्पना को साकार करने का सपना देख तो दूसरी ओर सड़को पर चारो ओर गौ माता पीडित हैं।
कथा व्यास महामृत्युंजय पीठाधीश्वर प्रणवपुरी जी महाराज ने कहा कि उदाहरण के तौर पर देखे तो आज गौ माता कितनी प्रताड़ित है। सड़कों पर भूख प्यास से पीडित होकर भटकती फिरती है। कही कही तो कतिपय लोग गौ माता की हत्या करने से भी बाज नही आते हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या में भगवान राम का मन्दिर तो जल्द बनने जा रहा है किंतु उससे समूचे देश मैं रामराज्य स्थापित नहीं होगा। व्यहारिक में राम राज्य आये यह परिकल्पना हमें रामचरित मानस ही सिखाता है। यदि अध्यात्म रूप से जीवन में राम राज्य लाना है तो हमें सरल भाषा मैं रचित मानस ग्रन्थ का अध्ययन कर  उसमें बताऐ गए रास्ते पर चलकर  भगवान की ओर उन्मुख होना होगा। उन्होंने कहा कि लोग अपने जीवन मैं  रावण रूपी राछस का अनुसरण कर कदाचित अनुचित व्यवहार तो करना जल्दी सीख जाते हैं किंतु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन का अनुसरण नहीं करते। इससे पूर्व राम जन्म के प्रसंग को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान तो प्रेम के वशीभूत हैं। प्रेम में ही आते जाते हैं और प्रेम करने वाले लोगों को ही दर्शन देते हैं। यदि परमात्मा के दर्शन करना है तो अहंकार को त्याग कर अपने भीतर प्रेम पैदा करना पड़ेगा। इससे पूर्व उन्होंने नारद मोह एवम मनु सतरूपा के प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया। प्रारंभ में शशी शिवाकांत अवस्थी अनिल मामा देवेश शाश्त्री  राकेश शिवहरे नवनीत आदि ने महाराजश्री का माल्यार्पण कर मानस की आरती उतारी। संचालन डॉ चन्द्रकान्त अवस्थी ने किया ।