शिक्षाविद् कॉम टी डी वैद एक व्यक्ति नहीं संस्था थे।:-रिपोर्ट-रविकान्त द्विवेदी, जालौन

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*”शिक्षाविद् कॉम टी डी वैद एक व्यक्ति नहीं संस्था थे।:-रिपोर्ट-रविकान्त द्विवेदी, जालौन*

ग्रामीण एडिटर, कृष्ण कुमार

उनका व्यक्तित्व एवं कृतित्व समाज के लिए अनुकरणीय है। मथुरा प्रसाद महाविद्यालय की स्थापना में उनके अकथनीय योगदान के माध्यम से उन्होंने कोंच की जनता पर उपकार किया है, जिसे आने वाली पीढ़ियां हमेशा याद रखेगी। उनके मानवता के लिए किए कार्य उन्हें महामानव की श्रेणी में प्रतिस्थापित करते हैं।”
उपरोक्त विचार श्री अशोक शुक्ला महिला महाविद्यालय कोंच के सभागार में मथुरा प्रसाद महाविद्यालय कोंच के संस्थापक प्राचार्य, इप्टा एवं प्रलेस कोंच के पूर्व संरक्षक कॉम टी डी वैद के 97 वें जन्मदिवस के अवसर पर इप्टा, प्रगतिशील लेखक संघ कोंच, श्रीमती सुशीला देवी वैद- टी डी वैद स्मृति न्यास के ततवावधान मे आयोजित ‘राष्ट्रीय एकता एवं सामाजिक विकास हेतु सांप्रदायिक सदभाव अपरिहार्य’ विषयक वाद विवाद प्रतियोगिता को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए मथुरा प्रसाद महाविद्यालय कोंच के पूर्व प्राचार्य प्रो वीरेंद्र सिंह ने व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि जीवन की चुनौतियों से कभी हार न मानते हुए वैद जी ने शैक्षिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, राजनैतिक मोर्चे पर सफलता अर्जित की। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन अनवरत होने चाहिए ताकि आने वाली पीढ़ियों को इससे प्रेरणा मिल सके।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक शुक्ला महिला महाविद्यालय कोंच के प्राचार्य डॉ अरविंद कुमार यादव ने कहा कि वर्तमान समय की सबसे बड़ी चुनौती सांप्रदायिक सद्भाव को अक्षुण्ण रखने की है, वैद जी ने जीवनपर्यन्त सांझा संस्कृति को बढ़ावा दिया, जिसका पालन अपरिहार्य है।
शिक्षाविद् वैद के अभिन्न सहयोगी रहे इप्टा एवं प्रलेस कोंच के संस्थापक अध्यक्ष एवं उनकी आत्मकथा वे दिन वे लोग के संपादक डॉ मुहम्मद नईम ने उनके जीवन से जुड़े अनेक पहलुओं पर प्रकाश डाला।
कार्यक्रम के अध्यक्ष अनिल कुमार वैद एडवोकेट ने कहा कि वैद जी जीवनपर्यत जिन मूल्यों के लिए जिए, उनका पालन करना हमारा दायित्व है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि उनके पदचिन्हों का अनुसरण करें।
इस अवसर पर महाविद्यालय के संरक्षक प्रमोद कुमार शुक्ला, अध्यक्ष शेखर शुक्ला, प्रबंधक विपिन शुक्ला विक्कू, डॉ एल आर श्रीवास्तव, समाजसेवी हाजी सेठ नसरुल्ला, सभासद जाहिद खान, राघवेन्द्र तिवारी, धर्मेन्द्र गोस्वामी, अखिल वैद, राजेन्द्र निगम आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर लोक कला विशेषज्ञ पी डी रिछारिया, अरविंद दीक्षित एडवोकेट, मोहम्मद अहमद, पुन्नी रिछारिया, मोहम्मद नौशाद, ट्रिंकल राठौर, योगवेंद्र कुशवाहा, अंकुल राठौर, प्रिंसी अग्रवाल, आस्था बाजपेई, भानुप्रताप, सैकी यादव, आदर्श अहिरवार आदि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का प्रारंभ अतिथियों द्वारा द्वीप प्रज्वलन कर एवं शिक्षाविद् टी डी वैद के चित्र पर माल्यार्पण कर किया। रंगकर्मियों अंकुल राठौर, साहना खान, कोमल, आदर्श, राज शर्मा, अमन खान, कैफ, युनस आदि द्वारा अतिथियों का बैच लगाकर स्वागत किया। रंगकर्मियों द्वारा इप्टा गीत बजा नगाड़ा शांति का एवं तू जिंदा है तो जिंदगी की जीत में यकीन कर से हुआ। ट्रिंकल राठौर द्वारा द्वारा श्रद्धांजली गीत चिठ्ठी न कोई संदेश प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में वाद विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ, जिसमें प्रथम राज शर्मा, द्वितीय दीक्षा राठौर, तृतीय अंशिका यज्ञिक एवं ज्योति निरंजन, समीक्षा अग्रवाल ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया। समस्त प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र एवं स्मृति चिन्ह देकर पुरस्कृत किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ मुहम्मद नईम ने, स्वागत आदित्य वैद ने एवं आभार सचिव पारसमणी अग्रवाल ने व्यक्त किया।

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